![]() |
दरभंगा टावर |
दरभंगा--नये पुलिस कप्तान के आने के बाद भले ही हेलमेट चेकिंग जोरों पर है पर ट्रेफिक व्यवस्था पूरी तरह लड़खराई हुई है। जाम का सबसे मुख्य कारण सड़कों पर क्षमता से अधिक वाहनों का होना। अतिक्रमण के कारण सड़कों की चौराई सिमटती जा रही है। इतना ही नहीं वाहनों और टेम्पुओं के बेतरतीव परिचालन जाम का एक प्रमुख कारण भी बना हुआ है। जहां तक ट्रैफिक पुलिस की प्रतिनियुक्ति का सवाल है तो जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस की तैनाती तो होती है लेकिन उसका असर यातायात व्यवस्था पर नहीं पड़ता है इसका क्या कारण है आपसभी भी समझ रहे होंगे। जहां तक अतिक्रमण की बात करें तो हर सड़क पर दोनों ओर अस्थायी दुकान नगर निगम और पुलिस प्रशासन के संरक्षण में सज रहें हैं जिसका उदाहरण दरभंगा का हृदय स्थली टॉवर है। एक तो प्रशासन ने कम चौड़ी सड़क पर डिवाडर बना दिया जिसके कारण सड़क के दोनों बगल के व्यवसायिक प्रतिष्ठान के सामने भारी संख्या में बाइक लग रहे हैं। व्यवसायियों का सामान भी सड़क पर ही सजते हैं जिसके कारण रिक्सा चलना भी मुश्किल लग रहा है। अब तो पूरे टावर परिसर में सैकड़ों की संख्या में दुकानें सजती है और उससे वसूली की जाती है। यही हाल प्रमंडलीय मुख्यालय से महज आधा किमी. की दूरी पर अवस्थित कॉमर्शियल चौक पर भी बीच सड़क पर दुकानें सज रही है। यही हाल पूरे शहर का है। सबसे बड़ी विडम्बना है कि समाहरणालय के सामने में वाहन पड़ाव को लेकर नो इंट्री का बोर्ड लगा है लेकिन व्यवहार न्यायालय और समाहरणालय के बीच वाली सड़क पर वाहनों का जामवाड़ा लगा रहता है। जिसके कारण यहां भी जाम ही नजर आते हैं। वैसे यह भी सच्चाई है कि न्यायालय और समाहरणालय के कार्य से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन यहां आते हैं लेकिन उनके वाहनों की ठहराव की कोई व्यवस्था नहीं है जिसके कारण लोग अपने वाहन खासकर बाइक यहीं पर लगाकर कार्य करने जाते हैं। वैसे सुरक्षा की दृष्टिकोण से भी यह उचित नहीं है लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। कुल मिलाकर कहें तो दरभंगा में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमराया हुआ है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें